अभिनेता राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी आत्मसमर्पण की तय समयसीमा समाप्त होने से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 9 सितंबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राहत पाने के लिए यह रकम जमा करना जरूरी होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को यह राशि अदालत की रजिस्ट्री में जमा करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। अदालत ने रकम जमा करने को राहत की शर्त बनाया है।
इससे पहले जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखी थी। उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। इससे पहले 18 मार्च 2026 को उन्हें जमानत मिली थी।
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अदालत ने राजपाल यादव के खिलाफ दर्ज सात मामलों में प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस तरह कुल जुर्माना 7.35 करोड़ रुपये है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उनकी सजा छह महीने तक बढ़ सकती है। हालांकि, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए कुल जेल अवधि तीन महीने होगी।
अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक मामले में जुर्माने की 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपये की राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी, जबकि 25 हजार रुपये राज्य को जाएंगे।
यह मामला राजपाल यादव की 2012 में निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े कथित बकाया भुगतान का है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी और इसे बनाने के लिए लिया गया कर्ज समय के साथ ब्याज समेत बढ़ता गया।
तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण से पहले राजपाल यादव ने मामले के कारण आर्थिक और भावनात्मक दबाव की बात कही थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद सलमान खान, सोनू सूद समेत कई लोगों के उनके आर्थिक मदद के लिए आगे आने की खबरें सामने आई थीं।
राजपाल यादव हाल में अक्षय कुमार की फिल्मों ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ में नजर आए हैं।
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