उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने कहा कि भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बिजली ग्रिड अवसंरचना को मजबूत करना होगा, बैटरी भंडारण क्षमता बढ़ानी होगी और स्वच्छ ऊर्जा की व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करनी होगी। यह बयान तुर्किए में 9 से 20 नवंबर तक प्रस्तावित सीओपी31 (COP31) जलवायु सम्मेलन से पहले आया है।
एसोचैम ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सहायक अवसंरचना में अधिक निवेश आवश्यक होगा। एसोचैम के महासचिव सौरभ संयाल ने कहा, "स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को केवल स्थापित करने भर से काम नहीं चलेगा, इसे ग्रिड से जोड़ा जाना चाहिए, भंडारण का समर्थन मिलना चाहिए और इसे व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाया जाना चाहिए। उद्योग और सरकार को मिलकर जलवायु प्रतिबद्धताओं को परियोजनाओं में बदलना होगा।"
उद्योग संगठन के अनुसार, जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 300.5 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 55.29 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि के बाद संभव हुआ, जिसमें 44.6 गीगावाट सौर ऊर्जा शामिल है। गैर-जीवाश्म स्रोत अब भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता के 54 प्रतिशत से अधिक हिस्से में योगदान दे रहे हैं, जिससे देश ने 2030 के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत के लक्ष्य को पांच साल पहले ही पार कर लिया है।
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एसोचैम ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए बढ़ती निवेश आवश्यकताओं को भी रेखांकित किया और अनुमान लगाया कि देश के 2030 जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, "2030 के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनुमानित 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है, जबकि बैटरी भंडारण की आवश्यकता 2027 तक 37 गीगावाट-घंटे (GWh) से बढ़कर 2031-32 तक 236 गीगावाट-घंटे होने का अनुमान है। स्थापित क्षमता को विश्वसनीय बिजली में बदलने के लिए ग्रिड अवसंरचना, भंडारण और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य स्वच्छ ऊर्जा को मजबूत करना आवश्यक होगा।"
उद्योग संगठन ने बताया कि वह 'फ्रॉम प्लेजेज टू प्रोजेक्ट्स: इंडियाज एजेंडा फॉर सीओपी31' (From Pledges to Projects: India's Agenda for COP31) शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग और संबंधित जलवायु-कार्रवाई समूहों को सौंप रहा है। इस रिपोर्ट में जलवायु वित्त जुटाने, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाने और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को निवेश तथा क्रियान्वयन में बदलने संबंधी सिफारिशें दी गई हैं।
निर्मल के. मिंडा ने कहा, "भारत ने यह साबित किया है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार कर सकती है, जिसने निर्धारित समय से पांच साल पहले ही अपनी आधी से अधिक स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर ली है। सीओपी31 को अब क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें उद्योग को केंद्रीय भूमिका निभानी होगी।"
एसोचैम ने यह भी कहा कि वह एक इंडस्ट्री टास्क फोर्स, एक बिजनेस क्लाइमेट इन्वेस्टमेंट एजेंडा और संबंधित मंत्रालयों के समक्ष प्रतिनिधित्व के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा निवेश और क्रियान्वयन का समर्थन करने के लिए उद्योग जगत की भागीदारी को आगे बढ़ाएगा।
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