उत्तर प्रदेश में बन रहा 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार इसे “एक्सप्रेसवे-कम-इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” मॉडल के तहत तैयार कर रही है, जिससे क्षेत्र में व्यापक आर्थिक विकास की उम्मीद है।
सरकारी बयान के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 12 औद्योगिक नोड स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए 6,508 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
अब तक इस परियोजना के लिए 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनसे करीब 47,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों में औद्योगिक विकास का नया नेटवर्क तैयार करेगी।
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गंगा एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तृत किया जा सकेगा। इसकी संरचना भी आठ लेन को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधा के लिए सर्विस रोड भी बनाई गई है।
यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा समय को 12 से 14 घंटे से घटाकर लगभग 6 से 7 घंटे कर देगा। इसकी अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जहां लड़ाकू विमान और कार्गो प्लेन उतर सकेंगे। यह उत्तर प्रदेश का तीसरा ऐसा एक्सप्रेसवे होगा।
टोल शुल्क के अनुसार, मेरठ से प्रयागराज तक कार से यात्रा करने पर करीब 1,515 रुपये का खर्च आ सकता है।
यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को उद्घाटित की जाएगी और इसे राज्य के विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है।
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