भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर शुक्रवार को एक अहम संकेत सामने आया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत अमेरिका निर्मित जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे बड़ी खबर बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और मजबूत हो सकती है।
जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है, जिसे लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स ने बख्तरबंद लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया है। इसका इस्तेमाल अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं द्वारा व्यापक रूप से किया जाता रहा है और इसे युद्ध में परखी गई प्रणाली माना जाता है।
यह कंधे से दागी जाने वाली प्रणाली स्वचालित मार्गदर्शन तकनीक से लैस है। मिसाइल दागे जाने के बाद लक्ष्य को खुद ट्रैक कर सकती है, जिससे ऑपरेटर तुरंत सुरक्षित स्थान ले सकता है और दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बच सकता है। इसकी खासियत ‘टॉप-अटैक’ क्षमता भी है, जिसमें मिसाइल ऊपर उठकर लक्ष्य के अपेक्षाकृत कमजोर हिस्से पर हमला करती है।
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अमेरिकी राजदूत ने कहा कि प्रस्तावित खरीद से भारत और अमेरिका के बीच सह-उत्पादन के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग फिलहाल रिकॉर्ड स्तर पर है।
अमेरिका के विदेश विभाग ने पिछले वर्ष नवंबर में भारत को संभावित रूप से 100 जैवलिन प्रणालियां और 216 एक्सकैलिबर निर्देशित तोपखाने के गोले बेचने की मंजूरी दी थी। इस प्रस्तावित सौदे का अनुमानित मूल्य 9.3 करोड़ डॉलर था।
भारत पहले से ही अमेरिका से अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, सी-17 और सी-130जे परिवहन विमान, पी-8आई समुद्री निगरानी विमान तथा एम777 हॉवित्जर जैसी रक्षा प्रणालियां खरीद चुका है। ऐसे में जैवलिन सौदा दोनों देशों की सैन्य साझेदारी को और व्यापक कर सकता है।
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