भारत और अमेरिका ने मंगलवार को क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई, खनन और प्रोसेसिंग को सुरक्षित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसकी जानकारी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दी। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत और अमेरिका के मजबूत रणनीतिक संबंधों का ठोस उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स की विश्वसनीय और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे।
रुबियो ने बताया कि इस दिशा में शुरुआती आधार फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स फोरम के दौरान रखा गया था। बाद में भारत के पैक्सिला समझौते से जुड़ने के बाद इसे और गति मिली। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ऐसी स्थिति नहीं चाहते जहां महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई किसी एक देश के नियंत्रण में हो और उसका इस्तेमाल रणनीतिक दबाव के लिए किया जाए।
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इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। इससे भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिलेगा और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।
इसी बीच क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी और बंदरगाह बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नए कदमों की घोषणा की। नई दिल्ली में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में डॉ. एस. जयशंकर, मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित और बाधारहित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करना क्वाड की प्राथमिकताओं में शामिल है।
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