भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलने की संभावना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि यूएई निकट भविष्य में भारत में 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने की तैयारी में है। दोनों देश 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 200 अरब डॉलर करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
मुंबई में भारत-यूएई उच्चस्तरीय संयुक्त कार्यबल की 14वीं बैठक के बाद गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच निवेश, नवाचार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। बैठक की सह-अध्यक्षता अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी के प्रबंध निदेशक शेख हमीद बिन जायद अल नाहयान ने की।
100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
गोयल के अनुसार, यूएई पहले ही भारत में करीब 25 अरब डॉलर निवेश कर चुका है और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। दोनों पक्ष दीर्घावधि में यूएई के भारत में कुल 100 अरब डॉलर निवेश के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं।
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यूएई बंदरगाह, जहाज निर्माण, अंतरिक्ष, स्टार्टअप और भारतीय शेयर बाजार में अवसर तलाश रहा है। वहीं भारत ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा। 2025 में गैर-तेल व्यापार 76.2 अरब डॉलर था।
ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा सहयोग
भारत यूएई से एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने के साथ रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के विस्तार पर भी विचार कर रहा है। भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच हुए समझौते के तहत यूएई भारत में रणनीतिक भंडारण सुविधाओं में 30 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल रख सकता है।
विशाखापत्तनम और ओडिशा के चांदीखोल में संभावित भंडारण स्थानों पर चर्चा हुई है। भारत फुजैराह में अपने रणनीतिक कच्चे तेल भंडार का कुछ हिस्सा रखने की संभावना भी तलाश रहा है।
बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र में साझेदारी
गोयल ने कहा कि आर्थिक विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को अगले दशक में अपनी बंदरगाह क्षमता दोगुनी करनी होगी। ऐसे में यूएई के लिए नए बंदरगाहों और मौजूदा बंदरगाहों के विस्तार में निवेश के अवसर हैं। महाराष्ट्र के वधावन और पूर्वी तथा पश्चिमी तट पर बंदरगाह परियोजनाओं को संभावित सहयोग क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों देशों ने जहाज स्वामित्व, आधुनिक बंदरगाह, जहाज निर्माण, मरम्मत, जहाज तोड़ने और कंटेनर निर्माण समेत छह क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
सीईपीए से व्यापार विस्तार पर जोर
भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की भी समीक्षा की गई। दोनों देश व्यापार बाधाओं को कम करने, नए क्षेत्रों को खोलने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं।
बैठक में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान प्रणालियों के एकीकरण और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा हुई। भारत और यूएई ने निवेश संबंधी लंबित मामलों को तेजी से सुलझाने तथा स्टार्टअप, अंतरिक्ष, खाद्य सुरक्षा, कृषि नवाचार और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया।
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