दीपावली के बाद चुनिंदा यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने इसकी घोषणा की है। यह शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा। हालांकि, इसे लागू करने की सटीक तारीख बाद में अधिसूचित की जाएगी।
एनपीसीआई ने बताया कि यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए शुल्क को दीपावली के तुरंत बाद लागू करने का फैसला किया है।
इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्ताव को टालकर एक जनवरी तक किया जा सकता है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने भी सरकार से प्रस्तावित शुल्क वापस लेने और व्यापारियों तथा ग्राहकों के लिए डिजिटल भुगतान व्यवस्था मुफ्त रखने की अपील की थी।
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क्या है एमडीआर का प्रस्ताव?
भुगतान नियामकीय ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने की योजना थी। इसे 15 अक्टूबर, 2026 से लागू किया जाना था। हालांकि, धनतेरस और दीपावली के दौरान डिजिटल खरीदारी बढ़ने के कारण आशंका जताई गई कि इस समय शुल्क लागू करने से व्यापारियों और डिजिटल भुगतान प्रणाली में भ्रम पैदा हो सकता है।
ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा शुल्क
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की आलोचना पर सरकार ने कहा कि एमडीआर से मिलने वाली राशि का एक भी पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा। यह रकम यूपीआई प्रणाली से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, कुल एमडीआर राशि का 40 प्रतिशत ग्राहक के बैंक, 30 प्रतिशत भुगतान गेटवे, 20 प्रतिशत यूपीआई ऐप और शेष 10 प्रतिशत ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगा।
आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा था कि एमडीआर के रूप में मामूली शुल्क लगाने से यूपीआई लेनदेन की संख्या पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
वहीं, जीटीआरआई ने दोहराया है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों और ग्राहकों के लिए यूपीआई को मुफ्त बनाए रखना चाहिए।
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