तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार, 7 सितंबर को राजनीति में महिलाओं के खिलाफ व्यक्तिगत हमलों और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई। विधानसभा में गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विजय ने कहा कि महिलाओं को निशाना बनाकर अभद्र, मानहानिकारक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणियां किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने ऐसी टिप्पणियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
विजय ने 1989 में विधानसभा के भीतर तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कथित अपमान का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को दोहराया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत की खराब राजनीतिक परंपराओं को आज के अनुचित व्यवहार को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
त्रिशा विवाद के बीच सख्त संदेश
मुख्यमंत्री ने हालिया विवाद का सीधे नाम लिए बिना संकेत दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति की आड़ में किसी महिला या अन्य व्यक्ति का व्यक्तिगत अपमान करना गलत है। विजय ने कहा कि तमिलनाडु में ऐसा लग रहा है जैसे अश्लीलता और नफरत की बाढ़ आ गई हो।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि तीखी राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत और मानहानिकारक टिप्पणियों की कोई जगह नहीं है। विजय ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा वह सहन नहीं करेंगे और जनता नेताओं के हर कदम पर नजर रख रही है।
यह बयान द्रमुक नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन से जुड़े विवाद के कुछ सप्ताह बाद आया है। स्टालिन को कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में थाने से जमानत मिल गई थी। उनकी टिप्पणी को अभिनेत्री त्रिशा से जोड़कर देखा गया था।
कानून-व्यवस्था पर भी बोले विजय
विजय ने तमिलनाडु की कानून-व्यवस्था पर कहा कि राज्य का विकास केवल सड़क, कारखानों और बुनियादी ढांचे से नहीं मापा जा सकता। लोगों को अपने दैनिक जीवन में कितना सुरक्षित महसूस होता है, यह भी विकास का महत्वपूर्ण पैमाना है।
उन्होंने कहा कि पुलिस आम नागरिकों के लिए सुलभ होनी चाहिए और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। विजय ने राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त पुलिस व्यवस्था और सभी के लिए समान कानून का भरोसा दिलाया।
कोयंबटूर में छात्र की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मामले में 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही उन्होंने युवाओं को अपराध की ओर धकेलने वाले कारणों में पारिवारिक सहयोग की कमी, साथियों का दबाव, सोशल मीडिया, नशे की लत और कानून की सीमित जानकारी को भी जिम्मेदार बताया।
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