उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को महानवमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक कन्या पूजन किया। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं के पैर धोकर उन्हें शक्ति स्वरूपा मानते हुए पूजा-अर्चना की और प्रदेश में शांति तथा समृद्धि की कामना की। पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने कन्याओं को वस्त्र, प्रसाद और दक्षिणा भेंट की।
नवरात्रि के नौ दिवसीय पर्व के दौरान देश भर में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से की जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा, "मेरी सभी प्रदेशवासियों से अपील है कि उत्सव उत्साह के साथ मनाया जाए, लेकिन उत्सव के माहौल में सुरक्षा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। हमें इसका ध्यान रखना चाहिए। विजयादशमी का पर्व हमें सभी बुराइयों और दुर्गुणों से मुक्त होने का संदेश भी देता है।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि सनातन परंपरा के अनुयायी इस शुभ अवसर पर कन्या पूजन कर इसे मनाते हैं। उन्होंने कहा, "आज शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि है। जगतजननी मां भगवती का नवम स्वरूप समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाला है। इस अवसर पर सनातन परंपरा का हर अनुयायी इस पावन पर्व और मातृशक्ति की शक्ति के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा अविवाहित बालिकाओं के पूजन अर्थात कन्या पूजन में भाग लेकर व्यक्त करता है।"
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उन्होंने आगे कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि शारदीय नवरात्र के इस नवम दिवस पर मुझे गोरखनाथ मंदिर की पवित्र परंपरा में भाग लेने, कन्याओं की पूजा करने और उन्हें भंडारा अर्पित करने का अवसर मिला।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि सनातन परंपरा की यह विशेषता है कि इसमें मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष में दो बार मनाई जाने वाली नवरात्रि—वासंतिक नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि—के माध्यम से भक्त न केवल जगतजननी मां भगवती से जुड़े अनुष्ठान करते हैं, बल्कि मातृशक्ति के प्रति अपना गहरा सम्मान और समर्पण भी व्यक्त करते हैं।
हिंदू पर्व दुर्गा पूजा, जिसे दुर्गोत्सव या शारदोत्सव भी कहा जाता है, प्रतिवर्ष देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का उत्सव मनाने के लिए आयोजित किया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान देवी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर अवतरित होती हैं। दुर्गा पूजा का समापन विजयादशमी (दशहरा) पर होता है, जो पर्व के दसवें दिन देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
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