कोलंबिया में रविवार (21 जून 2026) को हुए राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रवादी वकील अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को देश का नया राष्ट्रपति चुना गया है। प्रारंभिक मतगणना के अनुसार उनकी जीत ने कोलंबिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है, जिससे देश में दक्षिणपंथी और सख्त सुरक्षा नीतियों का दौर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।
अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला, जिन्हें उनके समर्थक “द टाइगर” के नाम से जानते हैं, ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो देश की कमजोर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर सकता है और कानून-व्यवस्था को मजबूत कर सकता है। उनका चुनाव अभियान मुख्य रूप से भ्रष्टाचार विरोध, आर्थिक सुधार और अवैध सशस्त्र समूहों तथा ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर केंद्रित रहा।
कोलंबिया लंबे समय से ड्रग कार्टेल और सशस्त्र विद्रोही समूहों की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में डे ला एस्प्रिएला ने जनता से वादा किया कि वह देश में स्थिरता और सुरक्षा बहाल करेंगे। उन्होंने खुद को “एंटी-एस्टेब्लिशमेंट” नेता के रूप में पेश किया, जो पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग हटकर काम करने में विश्वास रखते हैं।
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उनकी नीतियों में बाजार-समर्थक आर्थिक सुधारों पर भी जोर दिया गया है, जिससे विदेशी निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन की उम्मीद जताई जा रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि उनका नेतृत्व कोलंबिया को स्थिरता और विकास की नई दिशा देगा, जबकि आलोचक उनकी सख्त नीतियों को लेकर चिंतित हैं और इसे लोकतांत्रिक संतुलन के लिए चुनौती मानते हैं।
इस चुनाव परिणाम को लैटिन अमेरिका की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।
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