असम के बिस्वनाथ जिले के प्रशासन ने विदेशी घोषित किए गए एक व्यक्ति को भारत से निर्वासित करने का आदेश जारी किया है। जिला प्रशासन ने कायम अंसारी को इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत देश छोड़ने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश 2 जुलाई को बिस्वनाथ की जिला मजिस्ट्रेट करबी सैकिया करन द्वारा जारी किया गया। प्रशासनिक आदेश के अनुसार, कायम अंसारी को विदेशी न्यायाधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) द्वारा भारतीय नागरिक नहीं माना गया है। इसी निर्णय के आधार पर उनके खिलाफ निर्वासन की कार्रवाई शुरू की गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एक अन्य विदेशी घोषित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत नागरिकता संबंधी दस्तावेजों को अमान्य करार दिया था। इसके बाद राज्य में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों पर प्रशासन की कार्रवाई और तेज होती दिखाई दे रही है।
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विदेशी न्यायाधिकरण ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद कायम अंसारी को भारतीय नागरिक नहीं माना। इसके बाद जिला प्रशासन ने कानून के अनुरूप उन्हें भारत छोड़ने का आदेश जारी किया। प्रशासन का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल न्यायाधिकरण के आदेश का पालन सुनिश्चित करना है।
इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) अधिनियम, 1950 के तहत राज्य सरकार और जिला प्रशासन को ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के बाद विदेशी घोषित किया गया हो।
असम में नागरिकता और अवैध प्रवास का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। राज्य में विदेशी न्यायाधिकरण समय-समय पर नागरिकता से जुड़े मामलों की सुनवाई करता है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है और न्यायाधिकरण के आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।
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