सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शनिवार को उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दलित समुदाय के सबसे वंचित वर्गों के लिए अलग उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के इस्तीफे की मांग तक कर दी।
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और बिहार के हाजीपुर से लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने दलितों के लिए अलग उप-कोटा बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे दलित समुदाय के भीतर विभाजन पैदा हो सकता है। पासवान ने आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि जो लोग क्रीमी लेयर की अवधारणा का समर्थन करते हैं, उन्हें अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।
चिराग पासवान का यह रुख उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की सोच के अनुरूप है। रामविलास पासवान ने भी बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई अलग ‘महादलित’ श्रेणी का विरोध किया था।
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वहीं, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने उप-वर्गीकरण का समर्थन करते हुए कहा कि इसका लाभ दलित समुदाय को ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि दलितों में कुछ जातियां अपेक्षाकृत अधिक कमजोर हैं और उन्हें लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की जरूरत है। मांझी ने चिराग पासवान पर उनके तर्क को व्यापक दलित हितों में समझने में असमर्थ होने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की।
मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी बिना नाम लिए पासवान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘कोटे के भीतर कोटा’ और क्रीमी लेयर दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। उन्होंने मुसहर, भुइयां, नट और डोम जैसी जातियों के सामाजिक भेदभाव का उल्लेख किया।
दोनों नेताओं के बीच विवाद से एनडीए के सामने असहज स्थिति पैदा हो गई है। दोनों दल बिहार और केंद्र में गठबंधन सरकार के महत्वपूर्ण घटक हैं। लोकसभा में लोक जनशक्ति पार्टी के पांच और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) का एक सांसद है। बिहार विधानसभा में मांझी की पार्टी के पांच, जबकि पासवान की पार्टी के 19 विधायक हैं।
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