दिल्ली के गोविंदपुरी अग्निकांड मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित आगजनी का मामला था। पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें एक नकाबपोश महिला आग लगने से कुछ मिनट पहले पांच मंजिला इमारत में प्रवेश करती हुई दिखाई दे रही है। इस भीषण आग में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने चेहरे और सिर को पूरी तरह ढक रखा था। वह इमारत में दाखिल होने के कुछ ही देर बाद वहां से निकलकर फरार हो गई। जांच के दौरान पुलिस ने एक 17 वर्षीय किशोरी को हिरासत में लिया। पूछताछ में किशोरी ने बताया कि उसे 27 वर्षीय सरिता ने इमारत की पांचवीं मंजिल पर रहने वाले दीपक की स्कूटी में आग लगाने के लिए उकसाया था।
किशोरी ने खुलासा किया कि सरिता और दीपक के बीच पैसों को लेकर विवाद था। पुलिस के मुताबिक, सरिता ने ही किशोरी को पेट्रोल और माचिस उपलब्ध कराई थी। बाद में सरिता को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि यह साजिश 33 वर्षीय निरंजन और उसके 27 वर्षीय भाई राजकुमार के कहने पर रची गई थी, जो किसी निजी विवाद का बदला लेना चाहते थे।
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दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त हेमंत तिवारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी।
अब तक किशोरी समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या सदृश अपराध, आपराधिक साजिश, आगजनी और रात्रि में अवैध प्रवेश जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ दी हैं।
यह घटना 12 जून को तुगलकाबाद एक्सटेंशन स्थित नया तारा अपार्टमेंट के पास हुई थी। हादसे में पंकज (28), उनकी नानी सुशीला देवी (70) और बहन सोनी कुमारी (20) की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे।
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