हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार 36 घंटे से हो रही बारिश के कारण शिमला के संजौली इलाके में भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। इस घटना में करीब 10 घर प्रभावित हुए हैं, जबकि कम से कम तीन मकानों पर तत्काल खतरा मंडरा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने शिमला और आसपास के जिलों के लिए मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर में तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 20 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। फिलहाल इलाके में बादल छाए रहने, गरज के साथ बारिश और रुक-रुककर बौछारों का दौर जारी है।
लगातार बारिश से पहाड़ी ढलान कमजोर हो गए हैं, जिससे भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन द्वारा मानसून के दौरान निर्माण कार्यों पर रोक लगाए जाने के बावजूद इलाके में निर्माण गतिविधियां जारी रहीं। उन्होंने संबंधित निर्माण स्थल के मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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हालांकि, जमीन मालिक ने पिछले एक महीने से किसी भी तरह के निर्माण कार्य से इनकार किया है। वहीं, नगर निगम शिमला की टीमों ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित क्षेत्र की स्थिरता की जांच की जा रही है।
स्थानीय निवासी कैंथला ने दावा किया कि सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच भूस्खलन हुआ। उन्होंने कहा कि लोगों ने पहले भी नगर निगम से निर्माण रोकने की अपील की थी।
इसके अलावा न्यू शिमला के पास रझाणा गांव में भी भूस्खलन से कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। भारी मलबा और चट्टानें गिरने से सड़क मार्ग प्रभावित हुआ, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
इससे पहले किन्नौर जिले के उरनी क्षेत्र में लोहे का पुल भी गिर गया था। पुल टूटने के समय उस पर एक डंपर ट्रक गुजर रहा था, लेकिन चालक सुरक्षित बच गया।
प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। आपदा प्रबंधन दलों को अलर्ट पर रखा गया है।
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