कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) उल्लंघन मामले में सोमवार को बिहार के बेगूसराय स्थित एमपी-एमएलए अदालत से जमानत मिल गई। अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद विशेष न्यायाधीश विवेक चंद्र वर्मा ने उन्हें 10-10 हजार रुपये के दो मुचलकों पर रिहा करने का आदेश दिया।
यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का है, जब कन्हैया कुमार ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार के रूप में बेगूसराय संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था। उन पर आरोप था कि बछवाड़ा थाना क्षेत्र के रुदौली गांव में एक सरकारी भवन और एक मकान पर बिना अनुमति उनका चुनावी पोस्टर लगाया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया था।
जमानत मिलने के बाद कन्हैया कुमार ने कहा, "किसी ने सरकारी भवन पर मेरा पोस्टर चिपका दिया और प्रशासन ने मेरे खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। मैंने स्वयं जाकर पोस्टर नहीं लगाया था। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।"
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर अक्सर आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले दर्ज किए जाते हैं, जबकि सत्ता में बैठे लोग बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद है।
इस बीच कन्हैया कुमार ने हाल ही में राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इस घटना को "महापाप" बताते हुए मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की। उन्होंने विशेष जांच दल (एसआईटी) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धर्म का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। कांग्रेस जनता के मुद्दों पर राजनीति करेगी, धर्म के नाम पर नहीं।
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