केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शुक्रवार को विधानसभा में ‘वंदे मातरम्’ पूरा नहीं गाए जाने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब भी राज्यपाल सदन में मौजूद हों, तब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाया जाना चाहिए और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाना जरूरी है।
राज्यपाल ने विधानसभा से लौटने के बाद लोक भवन में कहा कि विधानसभा में उनके नीति संबोधन से पहले और बाद में बैंड टीम द्वारा केवल ‘वंदे मातरम्’ की शुरुआती पंक्तियां बजाई गईं, जबकि इसे पूरा गाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “जब राज्यपाल उपस्थित हों, तब ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाना आवश्यक है। यहां इसे गाया नहीं गया, केवल बजाया गया।”
आर्लेकर ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष थिरुवंचूर राधाकृष्णन से बातचीत की है और उम्मीद जताई कि इस मामले का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्थिति किस तरह विकसित होती है, यह देखना होगा।
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इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा नेता और कझाक्कूट्टम से विधायक वी मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाने का केंद्र सरकार का स्पष्ट निर्देश है, लेकिन केरल विधानसभा में इसका पालन नहीं किया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि यह लोक भवन और राज्यपाल का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम्’, जो अपने 150वें वर्ष का जश्न मना रहा है, उसका भी अनादर किया गया है।
भाजपा ने आरोप लगाया कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने यह कदम जमात-ए-इस्लामी और माकपा के दबाव में उठाया। पार्टी का दावा है कि इससे यह संदेश जाता है कि सरकार राष्ट्रीय गीत को धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानने वाले तर्कों को स्वीकार कर रही है।
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