महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों के बाद राज्य में नई राजनीतिक संभावनाओं और समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सबसे पहले अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष सुनील तटकरे ने मुंबई स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' में देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इसके कुछ ही समय बाद शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। एक ही दिन दोनों गुटों के नेताओं की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
हालांकि, इन बैठकों का एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और बैठक में शामिल किसी भी नेता ने बातचीत के विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इसी वजह से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एनसीपी के दोनों गुटों के बीच फिर से एकता की कोशिश हो रही है या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया समीकरण बन रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) ने पहले कांग्रेस के साथ विलय का प्रस्ताव भी रखा था। यह प्रस्ताव 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले भी चर्चा में आया था, लेकिन चुनावी व्यस्तताओं के कारण उस पर आगे बात नहीं बढ़ सकी।
बताया जाता है कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस प्रस्ताव पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से विचार करने को कहा था। बाद में महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं से राय ली गई, जहां अधिकांश नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। इसके बाद विलय की संभावना लगभग ठंडी पड़ गई।
इसी बीच फडणवीस से हुई मुलाकातों ने एक बार फिर चर्चाओं को हवा दे दी है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ नए समीकरण तलाश सकता है, जबकि कुछ इसे एनसीपी के दोनों गुटों के बीच दूरी कम करने की पहल मान रहे हैं। हालांकि, शरद पवार गुट ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह खारिज किया है।
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