संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पिछली बार दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण इस विधेयक को पारित नहीं करा सकी थी, लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच अब इसके दोबारा संसद में आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाला है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि परिसीमन विधेयक को इस सत्र में दोबारा पेश किया जाएगा या नहीं।
इससे पहले संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव था। विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। यह संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से काफी कम था।
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संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विशेष दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
लोकसभा में बहुमत का गणित
वर्तमान में लोकसभा में 540 सदस्य हैं और दो-तिहाई बहुमत के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 298 सांसदों का समर्थन है।
यदि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसद और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद सरकार का समर्थन करते हैं, तो एनडीए की संख्या बढ़कर 324 तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद वह बहुमत के आंकड़े से 36 सीट पीछे रहेगा।
वहीं, यदि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के 22 सांसद और शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के आठ सांसद समर्थन देते हैं, तो एनडीए की संख्या 354 तक पहुंच सकती है। फिर भी सरकार को दो-तिहाई बहुमत के लिए छह और सांसदों की जरूरत होगी।
सुप्रिया सुले ने दिया 50 प्रतिशत सीट बढ़ाने का सुझाव
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि परिसीमन को लेकर चल रही चर्चाएं केवल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और पार्टी ने अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि यदि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है। सुले ने बताया कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव चर्चा में आया था। इस फार्मूले के तहत महाराष्ट्र की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि अंतिम विधेयक सामने आने के बाद ही पार्टी अपना रुख तय करेगी। साथ ही उन्होंने एनसीपी-एसपी के किसी अन्य दल में विलय की खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर राजनीतिक फैसले लेगी।
यदि मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक पेश होता है, तो यह मोदी सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक परीक्षण होगा। अब नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इस बार जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटा पाएगी या नहीं।
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