दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के प्रदर्शन के दौरान पैरामिलिट्री फोर्स के एक जवान पर कथित तौर पर चाकू से हमला किए जाने की घटना सामने आई। हमले का आरोप एनएसयूआई के एक कार्यकर्ता पर लगा है। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह प्रदर्शन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के आंदोलन के तहत आयोजित किया गया था। बीते 2 अक्टूबर से लेफ्ट संगठनों और कांग्रेस की ओर से लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान पर धारदार वस्तु से कथित हमला किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली जिला पुलिस घटना के संबंध में कानूनी कार्रवाई कर रही है। घायल जवान का अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।
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प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र की ओर बढ़ने से रोक रही है।
इससे एक दिन पहले रविवार को भी जंतर-मंतर जाने को लेकर दिल्ली में काफी हंगामा हुआ था। लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के 15 जवानों के घायल होने की खबर सामने आई थी। इनमें कई महिला कांस्टेबल भी शामिल थीं। इसके अलावा पुलिस ने 110 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली से मुंबई तक इस मुद्दे पर प्रदर्शन हो चुके हैं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है।
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