पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव से पहले हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। यहां चुनावी व्यवस्था के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय दावों के अनुसार, रावलकोट और सुधनोती के बीच प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की गई, जिसमें आठ लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने के लिए एकत्र हुए थे। इस दौरान सुरक्षा बलों ने रावलकोट बस स्टैंड के आसपास उन्हें रोकने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए कथित तौर पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और गोलीबारी भी की गई। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं।
पीओके में पिछले कई सप्ताह से चुनावी व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी विधानसभा की आरक्षित सीटों की व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। पीओके विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पीओके में नहीं बल्कि पाकिस्तान के अन्य शहरों जैसे लाहौर, कराची और रावलपिंडी में रहते हैं।
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प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन आरक्षित सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार पीओके में अपनी पसंद की सरकार बनाने में प्रभाव डालती है। आंदोलनकारी इस व्यवस्था को खत्म करने या इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों का दावा है कि पिछले 36 दिनों में 80 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है और सैकड़ों नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव से पहले बढ़ते तनाव ने क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को और गंभीर बना दिया है। भारत ने भी पीओके के लोगों के खिलाफ कथित अत्याचारों को रोकने की अपील की है।
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