कश्मीरी पंडित कार्यकर्ता और सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता राकेश हांडू को साइबर आतंकवाद के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर कश्मीर में प्रवासी कर्मचारियों और कामगारों को निशाना बनाने वाली कथित आतंकी धमकियों से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप है। इस गिरफ्तारी के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राकेश हांडू, जिन्हें ‘बंटी’ के नाम से भी जाना जाता है, को 17 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित उनके आवास से बारामूला पुलिस की टीम ने गिरफ्तार किया। वह फिलहाल उत्तरी कश्मीर के बारामूला में दर्ज मामले के सिलसिले में जेल में बंद हैं।
रोहित रैना की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर
यह मामला बारामूला पुलिस स्टेशन में 12 सितंबर 2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 151/2026 से संबंधित है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66एफ, जो साइबर आतंकवाद से जुड़ी है, और धारा 84सी लगाई गई हैं। शिकायत रोहित रैना ने दर्ज कराई थी, जो प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम करते हैं और बारामूला के वित्त विभाग में तैनात हैं।
और पढ़ें: AI टूल्स से महिलाओं की अश्लील डीपफेक फोटो-वीडियो बनाने का बड़ा नेटवर्क उजागर, चीन-हॉन्गकॉन्ग से हो रहा संचालन
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, आरोप एक सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बार-बार साझा करने से जुड़े हैं। यह सामग्री ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ (यूएलसी) नामक संगठन से संबंधित बताई गई है। गिरफ्तारी मेमो में सामग्री में कथित बदलाव करने और उसे आगे प्रसारित करने का भी उल्लेख है।
समन के बावजूद जांच में शामिल नहीं होने का आरोप
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी कर हांडू को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा था। पुलिस के अनुसार, बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद वह जांच में शामिल नहीं हुए। हांडू ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए कश्मीर आने में असमर्थता जताई थी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होने का अनुरोध किया था।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि हांडू ने कश्मीरी पंडितों को धमकी देने वाले पोस्ट साझा किए थे। हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तारी पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचान
हांडू कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास, प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, सुरक्षित आवास और सुरक्षा ऑडिट जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उनकी वकालत को कथित अपराधों से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। समुदाय के कुछ सदस्यों ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
और पढ़ें: नागपुर में एटीएम से कैश फंसाकर ठगी, 41 ग्राहकों के 1.52 लाख रुपये उड़ाए