जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा से विधायक साजिद लोन ने विधानसभा में “दिखावे से ऊपर सार” को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बजट सत्र संबोधन पर पेश किए गए अपने प्रमुख संशोधनों को खारिज किए जाने की कड़ी आलोचना की। मंगलवार को विधानसभा में बोलते हुए लोन ने कहा कि उनके द्वारा पेश किए गए छह संशोधनों में से केवल चार को ही स्वीकार किया गया, जबकि शेष दो को “चयनात्मक तरीके” से खारिज कर दिया गया।
लोन ने चिंता जताई कि जिन संशोधनों को अस्वीकार किया गया, वे कश्मीर के लोगों से सीधे जुड़े बुनियादी मुद्दों पर केंद्रित थे। उनके अनुसार, उपराज्यपाल के संबोधन में कश्मीरियों की सुरक्षा, दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण और सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बेहतर अवसरों जैसे अहम विषयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
विधानसभा के बाहर बातचीत में साजिद लोन ने कहा कि जिन दो संशोधनों को नामंजूर किया गया, उनमें से एक अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35-ए और जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रयासों की स्पष्ट अभिव्यक्ति से संबंधित था। दूसरा संशोधन स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंतर-जिला और अंतर-डिवीजनल भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मांग से जुड़ा था, ताकि आरक्षण के युक्तिकरण से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान हो सके।
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लोन ने कहा कि विधानसभा में जो कुछ कहा और सुना गया, वही इतिहास में दर्ज होगा, न कि केवल बाहर दिखाया गया राजनीतिक नाटक। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का दायित्व जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना है, न कि उन्हें नजरअंदाज करना। उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक माहौल में सरकार और विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर एक तीखी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
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