सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत के मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह सेंगर की अपील पर सुनवाई कर तीन महीने के भीतर जमानत पर फैसला करे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वह सेंगर की 10 साल की सजा पर रोक नहीं लगा रही है, लेकिन हाई कोर्ट को एक सप्ताह के भीतर मामले की सुनवाई शुरू कर तीन महीने के भीतर फैसला देना चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता द्वारा दायर संबंधित अपीलों पर भी साथ-साथ सुनवाई की जाए।
सुनवाई के दौरान सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि पूर्व विधायक लगभग 9 साल 7 महीने की सजा काट चुके हैं और शेष अवधि के लिए अस्थायी राहत दी जानी चाहिए। वहीं सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि यह मामला 11 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए तय है और इसे प्राथमिकता देने का अनुरोध किया।
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न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सवाल उठाया कि अपील हत्या की धारा के तहत क्यों नहीं दायर की गई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सेंगर ने वास्तविक रूप से सात साल से थोड़ा अधिक समय ही जेल में बिताया है और इतने गंभीर मामले में सजा में छूट देना विवादास्पद है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सेंगर के वकील महमूद प्राचा को मामले पर मीडिया में टिप्पणी करने से भी चेतावनी दी और कहा कि ऐसा करने पर उनका लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है और हाई कोर्ट को तय समयसीमा में अपील का निपटारा करना होगा।
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