अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को संकेत दिया कि यदि देशों ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का समर्थन नहीं किया तो उन पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल कोपेनहेगन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के सांसदों से मुलाकात कर तनाव कम करने की कोशिश कर रहा था।
डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई महीनों से यह दावा करते आ रहे हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करना चाहिए। ग्रीनलैंड, नाटो सहयोगी देश डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के हाथों में नहीं आता है तो यह “अस्वीकार्य” होगा। उन्होंने शुक्रवार को कहा, “अगर देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर हमारा साथ नहीं देते हैं तो मैं उन पर टैरिफ लगा सकता हूं। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों पर या किस तरह के टैरिफ लगाए जाएंगे।
यह पहली बार है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का उल्लेख किया है। इससे पहले उन्होंने इस प्रकार की आर्थिक कार्रवाई की कोई बात नहीं कही थी। इसी सप्ताह, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों ने वाशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी।
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इस बैठक से दोनों पक्षों के बीच मतभेद समाप्त नहीं हो सके, लेकिन एक कार्यसमूह गठित करने पर सहमति जरूर बनी। हालांकि, इस कार्यसमूह के उद्देश्य को लेकर डेनमार्क सरकार और व्हाइट हाउस की ओर से अलग-अलग सार्वजनिक बयान सामने आए, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रही।
ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और सामरिक दृष्टि से आर्कटिक क्षेत्र में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है। अमेरिका की ओर से बार-बार नियंत्रण की बात उठाए जाने से न केवल डेनमार्क बल्कि यूरोपीय देशों में भी चिंता बढ़ गई है।
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