अमेरिका की एक नई खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी राजनयिकों और अधिकारियों को निशाना बनाने के अपने प्रयासों को "काफी हद तक" बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राजनयिकों के खिलाफ साज़िशें "उन्नत चरण" में पहुंच चुकी हैं। यह खुफिया मेमो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को संबोधित किया गया था।
अमेरिकी अधिकारियों को यह भी आशंका है कि यमन में ईरान-समर्थित हूती विद्रोही अपने हमलों का दायरा सऊदी अरब से आगे बढ़ाकर क्षेत्र के अन्य देशों तक फैला सकते हैं। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब में गैर-आपातकालीन कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया था।
इन रिपोर्टों के बीच अमेरिका कई खाड़ी देशों में स्थित अपने दूतावासों से भी इसी तरह के निकासी आदेश जारी करने की तैयारी कर रहा है, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज किया। उन्होंने कहा, "यह गलत है। अमेरिकी विदेश विभाग ने केवल सऊदी अरब में गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए निकासी आदेश जारी किया है।"
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पिगॉट ने इस निर्णय के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईरान-समर्थित हूती बलों द्वारा सऊदी अरब के भीतर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बढ़ती आक्रामकता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "ईरान-समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां तेज़ कर दी हैं, जिनमें नागरिक हवाई अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले शामिल हैं, जिनके चलते नागरिकों की मौत हुई है और यात्रा में भारी व्यवधान पैदा हुआ है।"
ईरान से जुड़ी यह नई खुफिया जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को तेहरान को सीधी सैन्य चेतावनी देते हुए संकेत दिया कि यदि ईरान किसी राजनयिक समझौते तक पहुंचने में विफल रहता है तो अमेरिका एक और संभावित हमला कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन ईरान को समझौते के लिए मजबूर करने के वास्ते एक और "छोटा एपिक फ्यूरी" अभियान शुरू कर सकता है।
फ्लोरिडा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने आक्रामक विदेश नीति अपनाते हुए अपने पिछले राष्ट्रीय सुरक्षा फैसलों को रेखांकित किया और ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधा। उत्साहित भीड़ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हम एक और छोटा एपिक फ्यूरी कर सकते हैं, या फिर वे सहमत हो जाएंगे।" तेहरान की रणनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "अगर वे समझदार हैं, तो वे बस इतना कहेंगे, 'चलो काम शुरू करते हैं।' लेकिन मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे, क्योंकि शायद वे समझदार नहीं हैं।"
नवंबर के पहले सप्ताह में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के मद्देनज़र विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों के अपने-अपने रुख सख्त करने के साथ पश्चिम एशिया में तनाव में तेज़ी देखी जा सकती है।
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