आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रहा है, खासकर IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रिया में। नई AI तकनीकों की मदद से गर्भधारण की सफलता दर बढ़ाने और मरीजों के खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. मनीका खन्ना, जो गौडियम IVF की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ने दो नए AI टूल—SiD (स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस) और ERICA (एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट)—को पेश किया। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों की मदद से IVF प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी हो सकती है।
ये AI टूल ब्रिटेन स्थित संस्था IVF 2.0 द्वारा विकसित किए गए हैं, जिसे भ्रूण विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. जैक्स कोहेन और डॉ. अलेजांद्रो चावे ने स्थापित किया है।
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SiD तकनीक बेहतर गुणवत्ता वाले स्पर्म की पहचान करने में मदद करती है, जबकि ERICA भ्रूण (एम्ब्रियो) की गुणवत्ता का विश्लेषण कर सबसे उपयुक्त विकल्प चुनने में सहायता करती है। इससे डॉक्टरों को निर्णय लेने में अधिक सटीकता मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन AI टूल्स के इस्तेमाल से IVF प्रक्रिया में बार-बार प्रयास करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे मरीजों पर पड़ने वाला मानसिक, शारीरिक और आर्थिक दबाव भी घटेगा।
डॉ. मनीका खन्ना ने कहा कि AI के उपयोग से इलाज की सफलता दर बढ़ेगी और मरीजों को जल्दी परिणाम मिल सकेंगे। इससे उपचार का कुल खर्च भी कम होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का यह बढ़ता उपयोग भविष्य में प्रजनन उपचार को और अधिक सुलभ और प्रभावी बना सकता है, जिससे लाखों दंपत्तियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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