समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर चल रहे मतभेद और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कथित टकराव को उजागर कर दिया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, लेकिन भाजपा इसे सुलझाने के बजाय अपनी अंदरूनी राजनीति और सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच शुरू करा दी, जबकि केंद्र सरकार की एजेंसियों ने इस मामले में कोई पहल नहीं की। उनके अनुसार, इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों सरकारों के बीच तालमेल की कमी है।
उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार साथ मिलकर काम नहीं कर रही, बल्कि आपस में संघर्ष कर रही है। यह सत्ता की लड़ाई है और उन्हें जनता की आस्था तथा श्रद्धा की कोई चिंता नहीं है।"
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पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या आयकर विभाग के दायरे में होता, तो इसकी जांच दिल्ली से होती। लेकिन इससे पहले ही लखनऊ ने कार्रवाई शुरू कर दी, जो सत्ता संघर्ष का परिणाम है।
अखिलेश यादव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ दौरे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई विधानसभा क्षेत्रों में अपने नेताओं को बदल सकती है।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य के विकास कार्यों पर भी सवाल उठाए। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए हैं और लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं की डिजाइन भी लोगों की सुविधा के अनुरूप नहीं है।
गौरतलब है कि राम मंदिर दान चोरी के मामले की जांच फिलहाल एसआईटी कर रही है और इस प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति लगातार गर्माई हुई है।
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