हाल के समय में घरों और दफ्तरों में बायोमेट्रिक और स्मार्ट लॉक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन कुछ घटनाओं के बाद इनकी सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। खासकर आग जैसी आपात स्थिति में ये लॉक काम नहीं करते, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आया, जहां एक गेमिंग जोन और लाइब्रेरी में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला कि वहां बायोमेट्रिक या स्मार्ट लॉक लगा हुआ था, जो आग लगने के बाद फेल हो गया। अंदर धुआं भरने से लोग बाहर नहीं निकल पाए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, बायोमेट्रिक और स्मार्ट लॉक में इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और मोटर लगी होती है, जो पासवर्ड या बायोमेट्रिक इनपुट पर काम करती है। ये सिस्टम बिजली और बैटरी पर निर्भर होते हैं। आग लगने पर इनके सर्किट जल सकते हैं या बैटरी फेल हो सकती है, जिससे दरवाजा लॉक रह सकता है।
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हालांकि, कई आधुनिक स्मार्ट लॉक में मैनुअल ओवरराइड सिस्टम और की-ओपनिंग विकल्प दिया जाता है, जिससे आपात स्थिति में दरवाजा खोला जा सकता है। लेकिन जिन जगहों पर यह सुविधा नहीं होती, वहां जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट लॉक पूरी तरह असुरक्षित नहीं हैं, लेकिन इन्हें खरीदते समय सावधानी जरूरी है। उपयोगकर्ताओं को ऐसे लॉक चुनने चाहिए जिनमें मैनुअल चाबी, बैटरी बैकअप और इमरजेंसी अनलॉक फीचर मौजूद हो।
अगर आप अपने घर में स्मार्ट लॉक लगवाने की सोच रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि वह किसी भी आपात स्थिति में फेल न हो और वैकल्पिक तरीके से खोला जा सके। सही चयन और सावधानी से ये लॉक सुरक्षा को और मजबूत बना सकते हैं, लेकिन लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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