झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च के दौरान सोमवार को रांची में तनाव बढ़ गया। विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए रांची पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने रांची में आंदोलन में शामिल सभी छात्रों से एकजुट रहने और विधानसभा मार्च को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की थी। रांची पुलिस ने भी मार्च को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पुलिस अधीक्षक पारस राणा ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इससे पहले रविवार को रांची में छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बैठक के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा था कि सरकार का मानना है कि छात्रों की ओर से उठाए गए 98 प्रतिशत मुद्दों को स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर सहमति जताई है, जिनमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा तथा 2023 और 2025 की बैकलॉग भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है। हेमंत सोरेन सरकार ने कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए अपराध अनुसंधान विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की जांच समेत कई कदमों की घोषणा की है।
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हालांकि, छात्रों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि उनकी मुख्य मांग केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की है, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा कर ‘झूठ’ फैलाने का आरोप लगाया। एक छात्र नेता ने कहा कि जिन 13 परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी, उनमें से केवल तीन परीक्षाएं रद्द की गई हैं।
छात्र नेताओं ने अपराध अनुसंधान विभाग की जांच पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि एजेंसी पहले भी मामलों को दबाने के आरोपों से जुड़ी रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कथित अनियमितताओं का सच सामने लाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।
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