पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर जिले के शेरों गांव में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता मोहंजीत सिंह ने कार्यक्रम स्थल के पास एक मकान की छत पर चढ़कर काला कपड़ा दिखाया और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
पुलिस ने मोहंजीत को एहतियातन हिरासत में ले लिया। संगरूर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रवजोत ग्रेवाल ने बताया कि हिरासत में लेने के बाद मोहंजीत की चिकित्सकीय जांच और डोप टेस्ट कराया गया। पुलिस के अनुसार डोप टेस्ट में उसका परिणाम सकारात्मक आया, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया गया और वह अपने परिवार के पास लौट गया।
हिरासत के दौरान पुलिस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी वीडियो साझा करते हुए आम आदमी पार्टी सरकार पर जनता की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब आम लोग सरकार से सवाल करते हैं तो उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाती है।
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मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सरकार के दावों के बावजूद विरोध करने वालों को दबाया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास बताया।
वहीं, मोहंजीत सिंह ने हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। उसने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उसे कुछ ऐसा पदार्थ दिया, जिसके कारण उसका डोप टेस्ट सकारात्मक आया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना के बाद विपक्ष को भगवंत मान सरकार पर निशाना साधने का नया मौका मिल गया है। पंजाब में बढ़ते नशे के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय रही है।
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