कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को कहा कि उन्होंने एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की थी, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने डावोस में दिए गए अपने हालिया बयान से पीछे हटने की कोशिश की है। ये टिप्पणियां पिछले सप्ताह डावोस में दिए गए उनके भाषण से जुड़ी थीं, जिनसे अमेरिकी राष्ट्रपति नाराज़ बताए गए थे।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि फोन कॉल के दौरान कार्नी “काफी आक्रामक तरीके से” डावोस भाषण की कुछ बातों से पीछे हटते नजर आए। उस भाषण में कार्नी ने देशों से नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के अंत को स्वीकार करने का आह्वान किया था।
कार्नी का कहना है कि अमेरिका द्वारा कनाडा के प्रमुख आयातों पर लगाए गए टैरिफ के कारण उनका देश व्यापारिक विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। फिलहाल कनाडा के लगभग 70 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को जाते हैं, लेकिन सरकार अब अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
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डावोस में दिए गए भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि कनाडा केवल अमेरिका के कारण अस्तित्व में है। इसके बाद उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ओटावा चीन के साथ कोई व्यापार समझौता करता है, तो वह कनाडाई आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगा देंगे।
कार्नी ने संवाददाताओं से कहा, “बिल्कुल स्पष्ट कर दूं, और मैंने यह राष्ट्रपति से भी कहा — डावोस में जो कहा, उसका वही अर्थ था।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (USMCA) की समीक्षा इस वर्ष के अंत में होनी है, और संभव है कि हालिया टिप्पणियां इसी प्रक्रिया से जुड़ी हों।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ट्रंप को बताया कि कनाडा टैरिफ का जवाब अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाकर, घरेलू उत्पादन मजबूत करके और USMCA के तहत नए रिश्ते खड़े कर सकारात्मक तरीके से दे रहा है। उनके अनुसार, ट्रंप ने इस बात को समझा।
जब उनसे सीधे पूछा कि क्या उन्होंने बातचीत में डावोस की टिप्पणियों से पीछे हटने की कोशिश की, तो कार्नी ने संक्षेप में जवाब दिया, “नहीं।”
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