तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को भी एक “नया हथियार” बना लिया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग जैसे केंद्रीय संस्थानों का भी इसी तरह राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री स्टालिन की यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई, जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अभिनेता शिवकार्तिकेयन की आगामी फिल्म ‘पराशक्ति’ को 25 कट्स के साथ रिलीज़ की अनुमति दी। यह फिल्म 10 जनवरी को रिलीज़ होने वाली है और इसे U/A सर्टिफिकेट दिया गया है। स्टालिन ने सेंसर बोर्ड के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता को दबाने के लिए अब सेंसर बोर्ड का भी उपयोग किया जा रहा है।
अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री ने लिखा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मूल अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार विभिन्न संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं के जरिए असहमति की आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि सत्ता के खिलाफ उठने वाली आवाज़ें कमजोर की जा सकें।
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स्टालिन ने यह भी कहा कि तमिल सिनेमा हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की आवाज़ रहा है, लेकिन अब उस पर भी अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे रचनात्मक जगत के लिए खतरनाक संकेत बताया और फिल्म निर्माताओं व कलाकारों से एकजुट होकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने की अपील की।
हालांकि, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिल्म ‘पराशक्ति’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
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