अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे राष्ट्रव्यापी छात्र प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन प्रदर्शनों को मुख्य रूप से शिक्षा और स्कूलों की खराब स्थिति से जुड़ा मानने से इनकार करते हुए इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया।
ट्रंप ने कहा कि यह मामला स्कूलों का नहीं, बल्कि इस्लाम के फ्रांस पर कब्जा करने की कोशिश से जुड़ा है। हालांकि, ट्रंप ने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया और न ही छात्र प्रदर्शनों तथा इस्लाम या प्रवासन के बीच कोई स्पष्ट संबंध बताया।
फ्रांस में छात्र मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें स्कूलों के लिए पर्याप्त बजट की कमी, शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में अधिक संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी और खराब बुनियादी ढांचा प्रमुख मुद्दे हैं। प्रदर्शनों को लेकर धार्मिक या पहचान आधारित मांगों का कोई स्थापित संबंध सामने नहीं आया है।
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ढाई लाख से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, देशभर में करीब 2.66 लाख लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। आंदोलन की शुरुआत हाईस्कूल के छात्रों और शिक्षकों से हुई थी, लेकिन बाद में अभिभावक, ट्रेड यूनियन और विश्वविद्यालयों के छात्र भी इसमें शामिल हो गए।
प्रदर्शनकारियों ने कई स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद किए और सरकारी स्कूलों की बिगड़ती स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, पुराने स्कूल भवन और अत्यधिक व्यस्त समय-सारिणी उनकी प्रमुख शिकायतों में शामिल हैं।
कुछ स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और खराब इन्सुलेशन के कारण गर्मी के दौरान विद्यार्थियों को परेशानी होने की बात भी सामने आई है।
पेरिस समेत कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। राजधानी में आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और अधिकारियों ने सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारी की सूचना दी।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 6 अक्टूबर को देशभर के प्रदर्शनों में करीब 2.66 लाख लोग शामिल हुए, जिनमें लगभग 56 हजार लोग पेरिस में थे।
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