फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की स्थिति को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को देश के कई प्रमुख शहरों में हुए प्रदर्शनों के दौरान 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि झड़पों में 53 पुलिसकर्मी घायल हो गए। फ्रांस के गृह मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। लगातार दूसरे सप्ताहांत हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आई हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को 75 जगहों पर आग लगने की घटनाओं से निपटना पड़ा और 24 दुकानों में लूटपाट हुई। अधिकारियों ने इन घटनाओं की जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय ने बताया कि झड़पें शांत होने के बाद शनिवार रात का बाकी समय अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा।
प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि टूलूज़ और क्लेरमों-फेरां में दो प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए। टूलूज़ में 20 वर्षीय युवक के दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई। एक सड़क चिकित्साकर्मी के मुताबिक, युवक की कई उंगलियां कट गईं। हालांकि, क्लेरमों-फेरां में घायल हुए दूसरे व्यक्ति की चोट के बारे में स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि उसकी कोई उंगली नहीं कटी।
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रिपोर्ट के अनुसार, पोइटियर्स में एक 19 वर्षीय युवक की बाईं आंख में भी चोट आई। एक फोटोग्राफर ने बताया कि यह घटना दंगा नियंत्रण पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुई, जिसमें स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, शनिवार को घायल हुए लोगों की चोटों के लिए इन हथियारों की भूमिका की अभी पुष्टि नहीं हुई है। कुछ मामलों में जांच जारी है।
छात्र नेताओं से मिलेंगे प्रधानमंत्री
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकॉर्नू सोमवार को छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। बैठक पेरिस स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय मैतिन्यों में होगी। इसमें शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे और उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट भी शामिल होंगे। बैठक के बाद मंत्री पत्रकारों से बातचीत कर सकते हैं।
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
फ्रांस में हाईस्कूल के छात्र एक महीने से अधिक समय से बेहतर स्कूल सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई स्कूलों के प्रवेश द्वारों पर अवरोध भी लगाए हैं।
पुलिस की कार्रवाई को लेकर अभिभावकों, छात्रों, मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि प्रदर्शन नियंत्रित करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया जा रहा है। फ्रांस में अप्रैल और मई में राष्ट्रपति चुनाव भी होने हैं, ऐसे में सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।
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