ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में तेज़ हवाओं के कारण व्यापक बिजली कटौती हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया। सरकारी विद्युत कंपनी ने बताया कि तेज़ झोंकों के चलते ट्रांसमिशन लाइन में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण यह ब्लैकआउट हुआ। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क्षेत्रीय दावों से उपजे भू-राजनीतिक तनावों के प्रभावों से ग्रीनलैंड पहले से ही जूझ रहा है।
राज्य की विद्युत कंपनी ने जानकारी दी कि बुक्सेफ्योर्ड जलविद्युत संयंत्र में तेज़ हवाओं के कारण ट्रांसमिशन लाइन में खराबी आ गई। कंपनी ने बताया कि आपातकालीन संयंत्र की मदद से बिजली बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं।
कुछ इलाकों में पानी की आपूर्ति और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहीं। हालांकि, रविवार तड़के 3:30 बजे तक करीब 20,000 की आबादी वाले नूक शहर में 75 प्रतिशत लोगों को फिर से बिजली मिल गई। अधिकारियों ने नागरिकों से बिजली के उपकरणों का सीमित उपयोग करने की अपील की है, क्योंकि प्रणाली को पूरी तरह सामान्य करने का काम जारी है।
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यह बिजली संकट ऐसे समय आया है जब ग्रीनलैंड सरकार ने हाल ही में आपदा तैयारी को लेकर एक पुस्तिका जारी की थी। इसमें नागरिकों को कम से कम पांच दिनों तक चलने वाला पेयजल, भोजन, दवाइयां, गर्म कपड़े और वैकल्पिक संचार साधन रखने की सलाह दी थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह चेतावनी किसी तात्कालिक संकट का संकेत नहीं है।
गौरतलब है कि डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय ध्यान मिला है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्वीप पर नियंत्रण को लेकर बयान दिए थे। हालांकि, दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान ट्रंप ने बलपूर्वक ग्रीनलैंड लेने की संभावना से इनकार किया और नाटो महासचिव के साथ भविष्य के ढांचे पर सहमति की बात कही।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि कथित समझौते का स्वरूप अभी अस्पष्ट है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “संप्रभुता हमारे लिए लाल रेखा है।”
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