व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो (NATO) गठबंधन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, भले ही उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ग्रीनलैंड को अमेरिका द्वारा खरीदे जाने की संभावना पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रही हो। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने बुधवार (7 जनवरी 2026) को यह जानकारी दी।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को उसके समृद्ध खनिज संसाधनों के कारण हासिल करने की इच्छा जता चुके हैं। हाल के महीनों में उन्होंने नाटो सहयोगियों के बीच तनाव भी बढ़ा दिया है, क्योंकि उन्होंने इस क्षेत्र को बलपूर्वक हासिल करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। गौरतलब है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क के साथ अपने संबंधों के कारण नाटो का हिस्सा माना जाता है।
व्हाइट हाउस ब्रीफिंग के दौरान कैरोलिन लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के लिए सभी विकल्प हमेशा खुले रहते हैं, लेकिन उनका पहला और प्राथमिक विकल्प हमेशा कूटनीति रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड का अधिग्रहण अमेरिका को आर्कटिक क्षेत्र में अधिक नियंत्रण देगा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके में संभावित आक्रामक गतिविधियों का मुकाबला करने में मदद करेगा।
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लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप रूस और चीन की आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को अमेरिका के हितों के लिए चुनौती मानते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ग्रीनलैंड को लेकर संभावित समझौता अमेरिका को रूस और चीन की आक्रामकता को रोकने में सक्षम बनाएगा। इसी कारण ट्रंप की टीम यह आकलन कर रही है कि यदि ग्रीनलैंड की खरीद होती है तो उसका स्वरूप कैसा हो सकता है।
इससे पहले बुधवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नाटो का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा, “हम हमेशा नाटो के साथ खड़े रहेंगे, भले ही वे हमारे साथ न खड़े हों।” ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस और चीन नाटो से तभी डरते हैं, जब तक अमेरिका इस गठबंधन का सदस्य है।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को कभी डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर दावे पर सवाल उठाते नहीं सुना है।
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