अमेरिका और ईरान के बीच घोषित संघर्षविराम मात्र 24 घंटे पुराना है, लेकिन मध्य पूर्व में हिंसा फिर शुरू होने और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने से यह समझौता संकट में आ गया है। होर्मुज़ को फिर से खोलना डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय किए गए संघर्षविराम की प्रमुख शर्तों में से एक था, लेकिन ईरानी सेना ने इसे इजराइल के लेबनान में हमलों के जवाब में बंद रखा।
लेबनान क्यों बना विवाद का केंद्र?
इजराइली रक्षा सेना (IDF) ने हिज़बुल्लाह ठिकानों पर अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले किए। केवल बुधवार को ही 182 लोग मारे गए और 800 से अधिक घायल हुए। बीरूत, साउथ लेबनान और बेक्का वैली में 10 मिनट में 100 मिसाइलें दागी गईं। इजराइल का दावा है कि हिज़बुल्लाह नागरिक क्षेत्रों से ऑपरेशन करता है, जबकि स्थानीय लोग और अधिकारी इसे खारिज करते हैं।
ईरान का कहना है कि लेबनान संघर्षविराम का हिस्सा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि संघर्षविराम में लेबनान में युद्ध रोकना शामिल था। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता।
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होर्मुज़ जलडमरूमध्य जाम
रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को केवल 11 जहाज होर्मुज़ से गुजर सके। ईरानी सेना ने कई जहाजों को वापस मोड़ दिया और तेल के निर्यात पर प्रति बैरल 1 अमेरिकी डॉलर तक का टोल लगाया। सबसे बड़े सुपरटैंकर 30 लाख बैरल क्रूड तेल ले जा सकते हैं, जिससे प्रत्येक यात्रा पर संभावित लागत अत्यधिक है।
लेबनान पर हिंसा और होर्मुज़ की बंदी ने संघर्षविराम को कमजोर कर दिया है, जबकि अमेरिका और ईरान की प्रतिनिधि बैठक 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में होगी।
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