नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बीच एक हरे रंग का मकान सुरक्षित बच जाने के बाद चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि चारों ओर तबाही के बावजूद यह इमारत कैसे खड़ी रही। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 987 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
मकान की मालिक लक्ष्मी पांडे ने बताया कि उनके परिवार के लिए यह किसी दूसरे जन्म जैसा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी घर में घुसने के बाद परिवार के सभी लोग ऊपरी मंजिल पर चले गए थे। इसके बाद पड़ोसियों ने उनकी मदद की और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
लक्ष्मी ने बताया कि नेपाल में आए भूकंप के दौरान भी उनके इलाके में तेज झटके महसूस हुए थे। आसपास के कई मकान ढह गए थे, लेकिन उनका घर मजबूती से खड़ा रहा था।
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करीब 4 हजार लोग अब भी लापता
नेपाल की आपदा प्राधिकरण के मुताबिक राहत और बचाव अभियान छठे दिन में पहुंच गया है और करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कई कर्मचारी भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।
आपदा एजेंसी के अनुसार 3,333 नेपाली नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। नुवाकोट जिले में 1,158 और पड़ोसी रसुवा जिले में 865 लोग लापता हैं। इनमें नेपाली सेना के 45 जवान, 38 पुलिसकर्मी तथा 18 सीमा शुल्क और आव्रजन अधिकारी भी शामिल हैं।
भारत में भी मिले शव
नेपाल से बहकर उत्तर प्रदेश की नदियों में पहुंचे 17 शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि ये बाढ़ पीड़ितों के शव हो सकते हैं। इनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है और अभी इन्हें आधिकारिक मृतक संख्या में शामिल नहीं किया गया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इस आपदा को सामान्य बाढ़ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और हिमस्खलन से शुरू हुई इस त्रासदी ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते खतरों की ओर ध्यान खींचा है।
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