महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर जारी कार्रवाई के बीच राज्य सरकार ने व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद खुले तेल की बिक्री से जुड़े कारोबारियों को एक साल की अस्थायी मोहलत देने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खुले तेल की बिक्री को लेकर वर्ष 2011 में कानून बनाया गया था और खाद्य तेल की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आज भी बड़ी संख्या में गरीब और आम लोग खुले में बिकने वाला खाद्य तेल खरीदते हैं। ऐसे में कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ आम लोगों और पारंपरिक कारोबारियों की समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है।
एफडीए और व्यापारियों की संयुक्त समिति बनेगी
सरकार अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए और व्यापारियों की एक संयुक्त समिति बनाएगी। यह समिति पारंपरिक कारोबार करने वाले व्यापारियों को कानून के अनुरूप अपने व्यवसाय में किस तरह के बदलाव करने होंगे, इसकी जानकारी और सुझाव देगी।
और पढ़ें: सिप्ला की पुणे इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस अनियमितताओं के चलते रद्द
सरकार जरूरत पड़ने पर कारोबारियों की मदद भी करेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि एक साल की यह मोहलत दोबारा नहीं बढ़ाई जाएगी। इस अवधि में सभी व्यापारियों को नए नियमों के अनुसार अपने कारोबार को ढालना होगा।
खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर एफडीए की कार्रवाई
इस बीच, महाराष्ट्र एफडीए ने मुंबई में गंभीर स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में चार खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित किए हैं। निरीक्षण के दौरान रसोई और खाद्य भंडारण क्षेत्रों में कॉकरोच तथा अन्य कीट पाए गए।
एफडीए के अनुसार, कुछ प्रतिष्ठानों में कृत्रिम रंग और एमएसजी का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा था। खाना पकाने के तेल को बार-बार इस्तेमाल किया गया था और वह गहरे रंग का तथा अत्यधिक ऑक्सीकृत पाया गया।
इसके अलावा, पका हुआ चावल अस्वच्छ परिस्थितियों में खुले में रखा मिला। कई जगहों पर नमी, फफूंद और पानी के जमाव जैसी समस्याएं भी पाई गईं। सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
और पढ़ें: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा पर बड़ी कार्रवाई, रेडियो क्लब समेत 13 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित