केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि भारत सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत तभी करती है, जब भारतीय कृषि, इससे जुड़े क्षेत्रों और किसानों के हितों की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित कर ली जाती है। उन्होंने विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।
लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि मंत्री ने कहा, “भारत एक शुद्ध कृषि निर्यातक देश है। सरकार एफटीए पर बातचीत केवल तभी करती है, जब भारतीय कृषि, इससे जुड़े क्षेत्रों और किसानों—विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों—के हितों की सावधानीपूर्वक रक्षा सुनिश्चित की जाती है। कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाते हैं।”
यह जवाब कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथान के प्रश्न के संदर्भ में दिया गया। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या उसने किसानों के संगठनों की उन चिंताओं का आकलन किया है, जिनके अनुसार प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते—विशेषकर अमेरिका के साथ संभावित समझौता—भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई थी कि ऐसे समझौतों से केरल के कासरगोड जैसे क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
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कृषि मंत्री ने अपने उत्तर में यह भी संकेत दिया कि सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक विचार-विमर्श करती है और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखती है। उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि भारतीय किसानों की आजीविका, कृषि उत्पादन और डेयरी क्षेत्र की स्थिरता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हालांकि, शिवराज सिंह चौहान ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अब तक कोई अलग आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन लोकसभा में दिए गए उनके उत्तर से यह स्पष्ट होता है कि सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही किसी भी एफटीए पर आगे बढ़ती है।
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