भारत ने जी20 देशों के साथ ऊर्जा, जल और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े चार साझा सहमति परिणामों को अपनाया है। इन फैसलों में घरेलू ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, ऊर्जा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया तेज करने, जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति शृंखला विकसित करने पर जोर दिया गया है।
तीन दिवसीय बैठक अमेरिका के टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में आयोजित की गई। इसकी मेजबानी व्हाइट हाउस नेशनल एनर्जी डॉमिनेंस काउंसिल, अमेरिकी ऊर्जा विभाग, आंतरिक विभाग और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने की।
बैठक में घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे विकल्पों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी, जिन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके। इनमें तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के इस्तेमाल को प्रमुख विकल्प के तौर पर रेखांकित किया गया। इसका उद्देश्य विकासशील देशों में पारंपरिक बायोमास आधारित ईंधनों की जगह अपेक्षाकृत स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की ओर तेजी से बदलाव को बढ़ावा देना है।
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जी20 देशों ने ऊर्जा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया को अधिक तेज और पूर्वानुमान योग्य बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। माना गया कि स्पष्ट और समयबद्ध अनुमति प्रक्रिया से ऊर्जा क्षेत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिल सकती है।
इसके अलावा, देशों ने स्वैच्छिक जल पुन: उपयोग पहल शुरू करने पर सहमति जताई। इसके तहत पानी की गुणवत्ता के आधार पर उसका पुनर्चक्रण कर कृषि, विनिर्माण और सामुदायिक क्षेत्रों में दोबारा इस्तेमाल करने को बढ़ावा दिया जाएगा। पहल का उद्देश्य जल संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित और विविध बनाने के लिए भी स्वैच्छिक सहयोग पर सहमति बनी। इसके तहत सदस्य देश साझा आंकड़ों, तकनीकी नवाचार और संयुक्त निवेश के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को अधिक मजबूत बनाने के प्रयास करेंगे।
इन खनिजों का इस्तेमाल ऊर्जा संक्रमण, उन्नत तकनीक और आधुनिक विनिर्माण से जुड़े कई क्षेत्रों में होता है। जी20 की यह सहमति ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
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