अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए अपनी सरकार की विदेश नीति और अमेरिकी शक्ति का उल्लेख किया। ट्रंप ने कहा कि जहां दूसरे नेता शांति की बात करते रहे, वहीं उनके प्रशासन ने शांति स्थापित करने के लिए कदम उठाए।
ट्रंप ने ईरान का सीधा जिक्र करते हुए कहा कि जब दूसरे नेताओं ने खतरों को नजरअंदाज किया, तब अमेरिका ने उनका सामना किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी नीतियों ने अमेरिका को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछली सरकार के कार्यकाल को “अमेरिका का अंधकार युग” बताते हुए अपने शासनकाल को “अमेरिका का स्वर्ण युग” कहा। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति और तकनीकी क्षेत्र की मजबूती का भी उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका कई क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
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ईरान से जुड़े संघर्ष के संदर्भ में ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य अभियान का भी जिक्र किया। हालांकि, इस संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है और कई क्षेत्रों में व्यवधान की स्थिति बनी है।
पुतिन से बोले- युद्ध खत्म करें
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचने के बाद ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए संदेश देते हुए कहा कि उन्हें “युद्ध खत्म करना चाहिए।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की प्रगति का भी उल्लेख किया।
संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की संभावना
ट्रंप लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र और महासचिव एंतोनियो गुटेरेस की आलोचना करते रहे हैं। महासभा में उनके संबोधन में संगठन की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी किए जाने की उम्मीद थी।
पिछले सप्ताह अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के बजट में कथित तौर पर 72.5 करोड़ डॉलर का भुगतान किया था। इससे संगठन के वित्तीय दायित्वों और अमेरिकी मतदान अधिकारों से जुड़े संभावित मुद्दों को लेकर बनी स्थिति में राहत मिली।
ट्रंप के इस संबोधन में अमेरिकी विदेश नीति, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों को प्रमुखता दी गई।
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