ईरान में व्यापक विरोध-प्रदर्शनों और सरकार की सख्त कार्रवाई के बीच कई भारतीय नागरिक, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं, वाणिज्यिक उड़ानों से नई दिल्ली लौट आए हैं। अब तक इन प्रदर्शनों और कार्रवाई में 2,500 से अधिक लोगों की मौत की खबर है। ये उड़ानें शुक्रवार (16 जनवरी 2026) की देर रात दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरीं। हालांकि, इन उड़ानों से लौटे भारतीयों की सटीक संख्या तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी।
दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे अली नक़वी ने बताया कि वह 12-13 यात्रियों के समूह का हिस्सा थे। उनसे जब ईरान में किसी परेशानी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हमें वहां कोई दिक्कत नहीं हुई।” उन्होंने बताया कि वे पहले इराक में थे और फिर ईरान गए, जहां आठ दिन रुकने के बाद भारत लौटे।
शिराज़ के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने कहा कि वहां इंटरनेट सेवाएं बंद थीं, जिसके कारण देश में क्या हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही थी। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि जिस शहर में वे रह रही थीं, वहां स्थिति सामान्य थी और वे किसी सरकारी व्यवस्था के तहत नहीं, बल्कि खुद वाणिज्यिक उड़ान से लौटी हैं।
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शुक्रवार रात कई लोग हवाई अड्डे पर अपने परिजनों को लेने पहुंचे। कुछ लोगों में चिंता जरूर दिखी, लेकिन उन्होंने कहा कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार उपलब्ध संचार माध्यमों से भारतीय नागरिकों को आश्वस्त करता रहा।
अब्बास काज़मी, जिनकी मां और मौसी ईरान से लौटी हैं, ने कहा कि इंटरनेट बंद होने के कारण चिंता बढ़ गई थी, लेकिन जैसे ही संपर्क बहाल हुआ, स्थिति नियंत्रण में होने का भरोसा मिला।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस समय ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं। हालिया हालात को देखते हुए सरकार ने कई परामर्श जारी किए हैं और भारतीय नागरिकों से गैर-आवश्यक यात्रा से बचने तथा उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने की अपील की है। सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।
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