अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और एच-1बी वीजा के इस्तेमाल पर कार्रवाई तेज करते हुए आठ बड़ी आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन यानी पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। इस सूची में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारियों के साथ इस कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग इन कंपनियों से नए पीईआरएम आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
पीईआरएम कार्यक्रम विदेशी कर्मचारियों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण है। इसमें नियोक्ता को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों की मजदूरी या कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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सोंडरलिंग ने आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने वर्षों से विदेशी कर्मचारी कार्यक्रमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। उनके मुताबिक, वर्ष 2009 से इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों का अनुरोध किया और दो लाख 30 हजार से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर हुए।
जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर विशेष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि कंपनी ने हजारों अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि उसे एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड का लाभ मिला।
इस कार्रवाई का भारतीय आईटी पेशेवरों पर खास असर पड़ सकता है, क्योंकि प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी बाजार में कुशल कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इन आव्रजन कार्यक्रमों का लंबे समय से इस्तेमाल करती रही हैं।
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