ईरान सरकार आने वाले कुछ दिनों में इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर सकती है। यह जानकारी ईरान की संसद के एक वरिष्ठ सदस्य ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को दी। सरकार ने देश में भड़के सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद कर दी थीं। यह अशांति 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे गंभीर आंतरिक संकट मानी जा रही है।
इसी बीच, सत्ता की पकड़ कमजोर होने के संकेत के रूप में रविवार देर रात ईरान के सरकारी टेलीविजन को कथित तौर पर हैक कर लिया गया। कुछ देर के लिए टीवी स्क्रीन पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के अपदस्थ शाह के बेटे के भाषण दिखाए गए, जिनमें जनता से विद्रोह करने की अपील की गई थी। हालांकि, कुछ ही समय में प्रसारण बहाल कर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से ईरान की सड़कों पर हालात अपेक्षाकृत शांत हैं। दिसंबर के अंत में शुरू हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शन तीन दिनों की भीषण हिंसा के बाद दबा दिए गए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने व्यापक कार्रवाई की थी, जिसके चलते देशभर में संचार सेवाएं बाधित कर दी गई थीं।
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एक ईरानी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि हिंसा में मरने वालों की पुष्टि की गई संख्या 5,000 से अधिक है। इनमें करीब 500 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। सबसे अधिक हिंसा उत्तर-पश्चिमी ईरान के कुर्द बहुल इलाकों में देखी गई। वहीं, पश्चिमी देशों में स्थित ईरानी मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि वास्तविक मृतक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंटरनेट प्रतिबंध हटाया जाता है, तो यह सरकार की ओर से तनाव कम करने और हालात को सामान्य करने की कोशिश मानी जाएगी। हालांकि, हालिया घटनाओं ने ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष की गहराई को उजागर कर दिया है।
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