संसद में स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सुनिश्चित किया कि हर सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रख सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में बोलने का अधिकार हर सांसद का संवैधानिक और नियम आधारित अधिकार है।
इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुई गहरी ऊर्जा संकट पर मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने सांसदों से अपील की कि सरकार ऊर्जा संकट, एलपीजी, तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान, और किसानों व जनता पर इसके प्रभावों को लेकर पारदर्शी चर्चा करे। खड़गे ने बताया कि एलपीजी सिलेंडरों की लंबी कतारें, घरेलू सिलेंडरों के लिए 25 दिन तक इंतजार, रेस्टोरेंट्स की बंदी, काले बाज़ार और बासमती चावल तथा गेहूं के निर्यात में बाधाएं आम जनता को परेशान कर रही हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद के बाहर भाजपा की नीतियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि बढ़ती कीमतें और बेरोज़गारी जनता पर भारी बोझ डाल रही हैं। उन्होंने एलपीजी की कीमतों में तत्काल कटौती और तेल मंत्री हर्षदीप सिंह पुरी के इस्तीफा की मांग की।
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लोकसभा में सत्र के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के स्पीकर ओम बिड़ला को हटाने के प्रस्ताव पर कटाक्ष किया। उन्होंने बताया कि स्पीकर का कार्य हमेशा संविधान और नियमों के अनुरूप रहा है। शाह ने राहुल गांधी की कम उपस्थिति और उनके अतार्किक मांगों पर भी आलोचना की, साथ ही 2013 के भारत-यूएस व्यापार समझौते के दौरान किसानों को हुए नुकसान पर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।
संसद सत्र में नियमों के पालन और ऊर्जा संकट पर गहन बहस हुई, जबकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी टिप्पणियों का आदान-प्रदान जारी रहा।
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