ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 538 हो गई है। यह जानकारी अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स एजेंसी ने दी है। एजेंसी के अनुसार, अब तक 10,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। मृतकों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, जबकि आशंका जताई गई है कि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
रविवार (11 जनवरी, 2026) को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़रायल “अराजकता और अव्यवस्था” फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतें ईरान में “दंगे भड़काने” के आदेश दे रही हैं। राष्ट्रपति ने ईरानी नागरिकों से अपील की कि वे “दंगाइयों और आतंकियों” से दूरी बनाए रखें और राष्ट्रीय एकता को कमजोर न होने दें।
इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने कड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला किया, तो अमेरिका और इज़रायल से जुड़े सैन्य ठिकाने और समुद्री मार्ग “वैध लक्ष्य” होंगे। उन्होंने संसद में राज्य टीवी पर प्रसारित टिप्पणी में कहा कि अमेरिकी सेना के केंद्रों और शिपिंग रूट्स को निशाना बनाया जा सकता है। उनके बयान में इज़रायल का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख था, जिसे ईरान एक कब्ज़ा किया गया फिलिस्तीनी क्षेत्र मानता है।
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विरोध प्रदर्शनों पर बढ़ती हिंसा और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी ने पश्चिम एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हालात चिंताजनक हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्थिति पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।
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