ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को सुरक्षा परिषद को बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक और विध्वंसक गतिविधियों में बदलने के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। रॉयटर्स द्वारा लिखे गए एक पत्र में ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका की भूमिका के कारण देशभर में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ीं।
इस बीच, इंटरनेट स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में देशव्यापी इंटरनेट बंदी 24 घंटे से अधिक समय तक जारी रही। इससे लोगों की आवाज दुनिया तक पहुंचने में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है।
उधर, अपदस्थ शाह के बेटे और सरकार विरोधी नेता रजा पहलवी ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की कि वे “ईरान के लोगों की मदद के लिए हस्तक्षेप के लिए तैयार रहें।” मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 62 हो गई है, जबकि अब तक करीब 2,300 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे। यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप के उस आश्वासन के विपरीत है, जिसमें उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने की बात कही थी।
ईरानी सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल से जुड़े “आतंकी एजेंट” हालिया प्रदर्शनों के दौरान आगजनी और हिंसा फैलाने में शामिल हैं। वहीं, अमेरिका ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईरान का यह दावा “भ्रमपूर्ण” है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा अमेरिका और इजरायल पर लगाए गए आरोप घरेलू चुनौतियों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
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