जून 2025 में इजराइल के साथ युद्ध के बाद ईरान में जासूसी और मोसाद से जुड़े मामलों में मृत्युदंड की संख्या में तेज़ी आई है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि जिन लोगों को मौत की सजा दी गई, वे देश में तोड़फोड़, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने या इजराइली संचालन में सहायता करने में शामिल थे।
हाल ही में कौरुश केवानी को फांसी दिए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर ईरान की बढ़ती कार्रवाई पर ध्यान गया। रिपोर्टों के अनुसार, केवानी को जून 2025 के युद्ध के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उस पर आरोप था कि उसने रणनीतिक स्थानों की संवेदनशील तस्वीरें और जानकारी इजराइली खुफिया एजेंसी को उपलब्ध कराई।
केवानी का मामला अकेला नहीं है। युद्ध के बाद से ईरान ने जासूसी के आरोप में कई लोगों को फांसी दी है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा पुष्टि किए गए कई मामलों में आरोपियों को मोसाद से जुड़े होने के कारण मौत की सजा दी गई।
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ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक थी और देश में किसी भी विदेशी खुफिया गतिविधि को रोकने के उद्देश्य से की गई। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा की है और कहा है कि आरोपियों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
ईरान में इन जासूसी मामलों ने देश के भीतर भय का माहौल पैदा कर दिया है, और खुफिया जांच की प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया गया है। इस समय, वैश्विक समुदाय ईरान की कार्रवाई पर नज़र बनाए हुए है और मानवाधिकार की दृष्टि से चिंता व्यक्त कर रहा है।
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