ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की खबर सामने आई है। इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान ने दावा किया है कि स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के पहले दिन उत्साहजनक परिणाम मिले हैं और दोनों देश अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमत हो गए हैं।
यह वार्ता 17 जून को हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद हुई, जिसका उद्देश्य वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करना और व्यापक शांति समझौते का रास्ता तैयार करना है। लेक ल्यूसर्न में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच करीब 18 घंटे तक चली बातचीत के बाद यह प्रगति सामने आई।
हालांकि, शांति प्रक्रिया के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरान के वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़ ने कहा कि होर्मुज अब कभी भी युद्ध-पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा और इसका संचालन नई “ईरानी व्यवस्थाओं” के तहत होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को अमेरिका पर कभी भरोसा नहीं था और आगे भी नहीं होगा।
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दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण बना हुआ है और अमेरिकी नौसेना इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
इस बीच, शांति प्रस्ताव के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर भी ट्रंप का बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नेतन्याहू से निपटना आता है और यदि कोई समस्या आती है तो उसका समाधान किया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति के बावजूद होर्मुज, क्षेत्रीय सुरक्षा और इजरायल की भूमिका जैसे मुद्दे अंतिम समझौते के रास्ते में बड़ी चुनौती बने रह सकते हैं।
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